श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 13: अर्जुनका युधिष्ठिरको आश्वासन देना तथा युद्धमें द्रोणाचार्यका पराक्रम  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.13.27 
न चैनं पाण्डवेयानां कश्चिच्छक्नोति भारत।
वीक्षितुं समरे क्रुद्धं महेन्द्रमिव दानवा:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
हे भरतपुत्र! जिस प्रकार दैत्यों की सेना क्रोधी देवराज इन्द्र की ओर देखने का साहस नहीं करती, उसी प्रकार पाण्डव सेना का कोई भी वीर युद्धभूमि में द्रोणाचार्य की ओर देख भी नहीं सकता था।
 
O son of Bharata! Just as the army of demons does not dare to look at the wrathful King of Gods Indra, similarly, none of the brave men from the Pandava army could even look at Dronacharya on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)