श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 13: अर्जुनका युधिष्ठिरको आश्वासन देना तथा युद्धमें द्रोणाचार्यका पराक्रम  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  7.13.15-16 
संजय उवाच
तत: शङ्खाश्च भेर्यश्च मृदङ्गाश्चानकै: सह।
प्रावाद्यन्त महाराज पाण्डवानां निवेशने॥ १५॥
सिंहनादश्च संजज्ञे पाण्डवानां महात्मनाम्।
धनुर्ज्यातलशब्दश्च गगनस्पृक् सुभैरव:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - महाराज! तत्पश्चात पाण्डव शिविर में शंख, वीणा, नगाड़े और आनक आदि बाजे बजने लगे। सहसा महाबली पाण्डवों की गर्जना सुनाई दी। धनुष की टंकार की भयानक ध्वनि आकाश में गूँजने लगी।
 
Sanjaya says - Maharaj! Thereafter in the Pandava camp the conches, harps, drums and instruments like Aanak started playing. Suddenly the roar of the great Pandavas was heard. The terrifying sound of the twang of the bow started reverberating in the sky.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)