श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 13: अर्जुनका युधिष्ठिरको आश्वासन देना तथा युद्धमें द्रोणाचार्यका पराक्रम  »  श्लोक 13-14
 
 
श्लोक  7.13.13-14 
अन्यच्च ब्रूयां राजेन्द्र प्रतिज्ञां मम निश्चलाम्॥ १३॥
न स्मराम्यनृतं तावन्न स्मरामि पराजयम्।
न स्मरामि प्रतिश्रुत्य किंचिदप्यनृतं कृतम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! मैं आपसे अपनी दूसरी दृढ़ प्रतिज्ञा कहता हूँ। मुझे स्मरण नहीं आता कि मैंने कभी झूठ बोला हो। मुझे स्मरण नहीं आता कि मैं कहीं पराजित हुआ हूँ और मुझे स्मरण नहीं आता कि मैंने कभी प्रतिज्ञा करके उसे मिथ्या कर दिया हो॥13-14॥
 
Maharaj! I tell you my second firm pledge. I do not remember that I have ever told a lie. I do not remember that I have been defeated anywhere and I do not remember that I have made a pledge and then made it false.॥ 13-14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)