श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 129: भीमसेन और कर्णका युद्ध तथा कर्णकी पराजय  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  7.129.29 
सुस्राव चास्य रुधिरं विद्धस्य परमेषुभि:।
धातुप्रस्यन्दिन: शैलाद् यथा गैरिकधातव:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
उन उत्तम बाणों से बिंधी हुई कर्ण की छाती से बहुत अधिक रक्त बहने लगा, मानो किसी पर्वत से गेरू धातु (गेरू) धातु की धाराएँ बह रही हों।
 
A lot of blood started pouring from Karna's chest which was pierced by those excellent arrows, as if ochre metal (ochre) was flowing from a mountain flowing streams of metal.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)