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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 129: भीमसेन और कर्णका युद्ध तथा कर्णकी पराजय  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.129.28 
तै: कर्णोऽराजत शरैरुरोर्मध्यगतैस्तदा।
महीधर इवोदग्रस्त्रिशृङ्गो भरतर्षभ॥ २८॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! उन बाणों को छाती के बीचोंबीच लगाकर कर्ण तीन शिखरों वाले ऊँचे पर्वत के समान शोभायमान हो गया।
 
O best of the Bharatas! With those arrows stuck right in the middle of his chest, Karna became as beautiful as a high mountain with three peaks. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)