श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 129: भीमसेन और कर्णका युद्ध तथा कर्णकी पराजय  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.129.2 
न हि पश्याम्यहं तं वै त्रिषु लोकेषु कंचन।
क्रुद्धस्य भीमसेनस्य यस्तिष्ठेदग्रतो रणे॥ २॥
 
 
अनुवाद
मैं तीनों लोकों में ऐसा कोई नहीं देखता जो युद्धभूमि में क्रुद्ध भीमसेन के सामने खड़ा हो सके।
 
I do not see anyone in the three worlds who can stand before an enraged Bhimasena on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)