श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 128: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धाओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना  »  श्लोक 53-54h
 
 
श्लोक  7.128.53-54h 
दृष्ट्वा विनिहतान् भ्रातॄन् भीमसेनेन संयुगे॥ ५३॥
कच्चिद् दुर्योधनो मन्द: शममस्मासु धास्यति।
 
 
अनुवाद
‘क्या रणभूमि में भीमसेन द्वारा अपने भाइयों को मारा जाता देखकर मूर्ख दुर्योधन हमसे संधि करेगा?॥ 53 1/2॥
 
‘Will the foolish Duryodhana enter into a treaty with us after seeing his brothers being killed by Bhimasena on the battlefield?॥ 53 1/2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd