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mahabharat 7.128.51-52h: क्या दुर्योधन के हित की चिन्ता करने वाला राजा जयद्रथ अर्जुन के हाथों मारा जाकर शत्रुओं को प्रसन्न करेगा? 51 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.128: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धाओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 128: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धाओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना  »  श्लोक 51-52h
 
 
श्लोक  7.128.51-52h 
कच्चित् सैन्धवको राजा दुर्योधनहिते रत:॥ ५१॥
नन्दयिष्यत्यमित्रान् हि फाल्गुनेन निपातित:।
 
 
अनुवाद
क्या दुर्योधन के हित की चिन्ता करने वाला राजा जयद्रथ अर्जुन के हाथों मारा जाकर शत्रुओं को प्रसन्न करेगा? 51 1/2॥
 
Will King Jayadratha, who was always on the lookout for Duryodhana's welfare, bring joy to the enemy by being killed by Arjuna?' 51 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)