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mahabharat 7.128.5: महाराज! जिस प्रकार स्थिरचित्त इन्द्र अपने वज्र का प्रयोग करते हैं, उसी प्रकार भीमसेन की गदा ने युद्धभूमि में आपके सैनिकों को कुचल डाला।   |   mahabharat अध्याय 7.128: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धाओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 128: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धाओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.128.5 
इन्द्राशनिरिवेन्द्रेण प्रविद्धा संहतात्मना।
प्रामथ्नात् सा महाराज सैनिकांस्तव संयुगे॥ ५॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जिस प्रकार स्थिरचित्त इन्द्र अपने वज्र का प्रयोग करते हैं, उसी प्रकार भीमसेन की गदा ने युद्धभूमि में आपके सैनिकों को कुचल डाला।
 
Maharaj! Just as the steady-minded Indra uses his thunderbolt, in the same manner that mace wielded by Bhimasena crushed your soldiers on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)