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mahabharat 7.128.48: यह बड़े सौभाग्य की बात है कि महाबली अर्जुन, जिनके सिर पर मुकुट सुशोभित है, जिनका रथ श्वेत घोड़ों से जुता हुआ है, जिनके सारथी भगवान श्रीकृष्ण हैं और जो मुझे सदैव प्रिय हैं, वे अभी तक जीवित हैं ॥ 48॥   |   mahabharat अध्याय 7.128: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धाओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 128: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धाओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  7.128.48 
किरीटमाली बलवान् श्वेताश्व: कृष्णसारथि:।
मम प्रियश्च सततं दिष्टॺा पार्थ: स जीवति॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
यह बड़े सौभाग्य की बात है कि महाबली अर्जुन, जिनके सिर पर मुकुट सुशोभित है, जिनका रथ श्वेत घोड़ों से जुता हुआ है, जिनके सारथी भगवान श्रीकृष्ण हैं और जो मुझे सदैव प्रिय हैं, वे अभी तक जीवित हैं ॥ 48॥
 
It is a matter of great fortune that the mighty Arjuna, whose head is adorned with a crown, whose chariot is drawn by white horses, whose charioteer is Lord Krishna and who is always dear to me, is still alive. ॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)