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mahabharat 7.128.47: पार्थ, जिन्होंने अपने शस्त्रों की शक्ति से दुर्योधन के लिए शक्तिशाली गंधर्व राजा चित्रसेन को हराया था, जीवित रहने के लिए भाग्यशाली हैं।   |   mahabharat अध्याय 7.128: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धाओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 128: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धाओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  7.128.47 
गन्धर्वराजं बलिनं दुर्योधनकृते च वै।
जितवान् योऽस्त्रवीर्येण दिष्टॺा पार्थ: स जीवति॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
पार्थ, जिन्होंने अपने शस्त्रों की शक्ति से दुर्योधन के लिए शक्तिशाली गंधर्व राजा चित्रसेन को हराया था, जीवित रहने के लिए भाग्यशाली हैं।
 
Partha, who with the power of his weapons defeated the powerful Gandharva king Chitrasena for Duryodhana, is fortunate to be alive.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)