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mahabharat 7.128.45: यह सौभाग्य की बात है कि मत्स्य देश की राजधानी के निकट विराट की गौओं का अपहरण करने के लिए एकत्रित हुए समस्त कौरवों को पराजित करने वाले पार्थ अब तक जीवित हैं ॥ 45॥   |   mahabharat अध्याय 7.128: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धाओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 128: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धाओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  7.128.45 
कौरवान् सहितान् सर्वान् गोग्रहार्थे समागतान्।
योऽजयन्मत्स्यनगरे दिष्टॺा पार्थ: स जीवति॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
यह सौभाग्य की बात है कि मत्स्य देश की राजधानी के निकट विराट की गौओं का अपहरण करने के लिए एकत्रित हुए समस्त कौरवों को पराजित करने वाले पार्थ अब तक जीवित हैं ॥ 45॥
 
It is a matter of good fortune that Partha, who had defeated all the Kauravas near the capital of Matsya country, who had come together to abduct the cows of Virata, is still alive. ॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)