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mahabharat 7.128.41: यह भी हर्ष की बात है कि वीर सात्यकि सकुशल हैं। मैं सौभाग्यशाली हूँ कि इस समय भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन की गर्जना सुन पा रहा हूँ ॥ 41॥   |   mahabharat अध्याय 7.128: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धाओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 128: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धाओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  7.128.41 
दिष्टॺा च कुशली वीर: सात्यकि: सत्यविक्रम:।
दिष्टॺा शृणोमि गर्जन्तौ वासुदेवधनंजयौ॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
यह भी हर्ष की बात है कि वीर सात्यकि सकुशल हैं। मैं सौभाग्यशाली हूँ कि इस समय भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन की गर्जना सुन पा रहा हूँ ॥ 41॥
 
It is also a matter of joy that the brave Satyaki is safe and sound. I am fortunate to be able to hear the roar of Lord Krishna and Arjuna at this time. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)