Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.128.38-39h: जब मदमस्त भीमसेन ने बार-बार गर्जना की, तब धर्मपुत्र महाबाहु युधिष्ठिर मुस्कराए और मन में कुछ सोचते हुए अपने हृदय में जो कुछ था, वह कहने लगे-॥38 1/2॥ | mahabharat अध्याय 7.128: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धाओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब मदमस्त भीमसेन ने बार-बार गर्जना की, तब धर्मपुत्र महाबाहु युधिष्ठिर मुस्कराए और मन में कुछ सोचते हुए अपने हृदय में जो कुछ था, वह कहने लगे-॥38 1/2॥
When the intoxicated Bhimasena roared repeatedly, the mighty-armed Yudhishthira, the son of Dharma, the best of the righteous, smiled and while thinking something in his mind, began to speak what was in his heart -॥ 38 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥