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mahabharat 7.128.36: नरेश्वर! भीमसेन और धनुर्धर अर्जुन की गर्जना सुनकर धर्मपुत्र युधिष्ठिर बहुत प्रसन्न हुए॥36॥   |   mahabharat अध्याय 7.128: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धाओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 128: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धाओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  7.128.36 
भीमसेनरवं श्रुत्वा फाल्गुनस्य च धन्विन:।
अप्रीयत महाराज धर्मपुत्रो युधिष्ठिर:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! भीमसेन और धनुर्धर अर्जुन की गर्जना सुनकर धर्मपुत्र युधिष्ठिर बहुत प्रसन्न हुए॥36॥
 
Nareshwar! Hearing the roar of Bhimsen and the archer Arjun, Dharma's son Yudhishthir became very happy. 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)