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mahabharat 7.128.25: जिस प्रकार बढ़ता हुआ तूफ़ान वृक्षों को उखाड़ देता है और समुद्र का वेग पर्वतों को तोड़ डालता है, उसी प्रकार भीमसेन क्षत्रियों को कुचलते हुए और कौरव सेना को छिन्न-भिन्न करते हुए युद्धभूमि में आगे बढ़े।   |   mahabharat अध्याय 7.128: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धाओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 128: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धाओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.128.25 
स मृद्नन् क्षत्रियानाजौ वातो वृक्षानिवोद्धत:।
आगच्छद् दारयन् सेनां सिन्धुवेगो नगानिव॥ २५॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार बढ़ता हुआ तूफ़ान वृक्षों को उखाड़ देता है और समुद्र का वेग पर्वतों को तोड़ डालता है, उसी प्रकार भीमसेन क्षत्रियों को कुचलते हुए और कौरव सेना को छिन्न-भिन्न करते हुए युद्धभूमि में आगे बढ़े।
 
Just as a rising storm uproots trees and the force of the ocean shatters mountains, similarly Bhimasena advanced on the battlefield, trampling the Kshatriyas and tearing apart the Kaurava army.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)