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mahabharat 7.128.24: तत्पश्चात् पराक्रमी भीमसेन पुनः अपने रथ पर सवार होकर आपके पुत्र की सेना पर बड़े बल से टूट पड़े।   |   mahabharat अध्याय 7.128: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धाओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 128: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धाओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  7.128.24 
तत: स्वरथमास्थाय भीमसेनो महाबल:।
अभ्यद्रवत वेगेन तव पुत्रस्य वाहिनीम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् पराक्रमी भीमसेन पुनः अपने रथ पर सवार होकर आपके पुत्र की सेना पर बड़े बल से टूट पड़े।
 
Thereafter the mighty Bhimasena once again mounted his chariot and attacked your son's army with great force.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)