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mahabharat 7.128.23: हे कुरुणपुत्र! उसी समय भीमसेन का सारथि तुरन्त घोड़ों को वहाँ ले आया। वह बड़ी आश्चर्यजनक बात थी॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 7.128: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धाओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 128: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धाओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.128.23 
तस्मिन् क्षणे तस्य यन्ता तूर्णमश्वानचोदयत्।
भीमसेनस्य कौरव्य तदद्भुतमिवाभवत्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुणपुत्र! उसी समय भीमसेन का सारथि तुरन्त घोड़ों को वहाँ ले आया। वह बड़ी आश्चर्यजनक बात थी॥ 23॥
 
O son of Kuruṇā! At this very moment Bhimasena's charioteer immediately drove the horses there. That was an astonishing thing.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)