Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.128.22: किन्तु पलक झपकते ही द्रोणाचार्य पुनः अपने रथ पर बैठे हुए दिखाई दिए। उस समय आपके योद्धा विस्मय से आँखें फाड़े यह दृश्य देख रहे थे। | mahabharat अध्याय 7.128: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धाओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
किन्तु पलक झपकते ही द्रोणाचार्य पुनः अपने रथ पर बैठे हुए दिखाई दिए। उस समय आपके योद्धा विस्मय से आँखें फाड़े यह दृश्य देख रहे थे।
But Dronacharya was again seen sitting on his chariot in the blink of an eye. At that time your warriors were watching this scene with their eyes wide open in amazement.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥