Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.128.17: जिस प्रकार बैल खेल-खेल में वर्षा के वेग को अपने शरीर पर ग्रहण कर लेता है, उसी प्रकार सिंह-पुरुष भीमसेन ने अपने गुरु के बाणों की वर्षा को अपने शरीर पर ग्रहण कर लिया। | mahabharat अध्याय 7.128: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धाओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यथा हि गोवृषो वर्षं प्रतिगृह्णाति लीलया।
तथा भीमो नरव्याघ्र: शरवर्षं समग्रहीत्॥ १७॥
अनुवाद
जिस प्रकार बैल खेल-खेल में वर्षा के वेग को अपने शरीर पर ग्रहण कर लेता है, उसी प्रकार सिंह-पुरुष भीमसेन ने अपने गुरु के बाणों की वर्षा को अपने शरीर पर ग्रहण कर लिया।
Just as a bull playfully absorbs the force of the rain on its body, in the same way the lion-man Bhimasena absorbed the shower of arrows from his teacher on his body.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥