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mahabharat 7.128.13: महाराज! द्रोणाचार्य और महाहृदयी भीमसेन का वह महान युद्ध देवताओं और दानवों के बीच होने वाले युद्ध के समान भयंकर था।   |   mahabharat अध्याय 7.128: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धाओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 128: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धाओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.128.13 
तद् युद्धमासीत् सुमहद् घोरं देवासुरोपमम्।
द्रोणस्य च महाराज भीमस्य च महात्मन:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
महाराज! द्रोणाचार्य और महाहृदयी भीमसेन का वह महान युद्ध देवताओं और दानवों के बीच होने वाले युद्ध के समान भयंकर था।
 
Maharaj! That great battle between Dronacharya and the great-hearted Bhimasena was as fierce as the war between gods and demons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)