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mahabharat 7.128.12: उस युद्धभूमि में आचार्य द्रोण ने अपने बाणों की तरंगों से भीमसेन को रोक दिया और सहसा गर्जना करके पाण्डवों के हृदय में भय उत्पन्न कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.128: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धाओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 128: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धाओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.128.12 
भीमं तु समरे द्रोणो वारयित्वा शरोर्मिभि:।
अकरोत् सहसा नादं पाण्डूनां भयमादधत्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
उस युद्धभूमि में आचार्य द्रोण ने अपने बाणों की तरंगों से भीमसेन को रोक दिया और सहसा गर्जना करके पाण्डवों के हृदय में भय उत्पन्न कर दिया।
 
In that battleground, Acharya Drona stopped Bhimasena with the waves of his arrows and suddenly roared, creating fear in the hearts of the Pandavas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)