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mahabharat 7.128.10: रणभूमि में उन अजेय शत्रुओं को परास्त करके कुन्तीपुत्र भीमसेन पक्षीराज गरुड़ के समान शीघ्रतापूर्वक उस सेना को पार कर गये।   |   mahabharat अध्याय 7.128: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धाओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 128: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धाओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.128.10 
स तान् विद्राव्य कौन्तेय: संख्येऽमित्रान् दुरासदान्।
सुपर्ण इव वेगेन पक्षिराडत्यगाच्चमूम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
रणभूमि में उन अजेय शत्रुओं को परास्त करके कुन्तीपुत्र भीमसेन पक्षीराज गरुड़ के समान शीघ्रतापूर्वक उस सेना को पार कर गये।
 
Having routed those invincible enemies on the battlefield, Bhimasena, the son of Kunti, crossed over that army as swiftly as the king of birds, Garuda.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)