श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  7.127.9-10h 
तमब्रवीन्महाराज धृष्टद्युम्नो वृकोदरम्॥ ९॥
ईप्सितं ते करिष्यामि गच्छ पार्थाविचारयन्।
 
 
अनुवाद
महाराज! यह सुनकर धृष्टद्युम्न ने भीमसेन से कहा- 'कुन्तीनन्दन! आप बिना कुछ सोचे-समझे चले जाइए। मैं आपकी इच्छानुसार ही सब कुछ करूँगा।॥9 1/2॥
 
Maharaj! On hearing this Dhrishtadyumna said to Bhimasena- 'Kuntinandan! You go without thinking anything. I will do everything according to your wish.॥ 9 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)