Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.127.8-9h: अतः अब मैं अपने भाई अर्जुन और बुद्धिमान सात्यकि के मार्ग का अनुसरण करूँगा। अब तुम सावधान रहो और युद्धभूमि में कुन्तीपुत्र राजा युधिष्ठिर की रक्षा करो। इस युद्धभूमि में यही हमारे लिए सबसे बड़ा कार्य है। ॥8 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  7.127.8-9h 
यास्यामि पदवीं भ्रातु: सात्वतस्य च धीमत:।
सोऽद्य यत्तो रणे पार्थं परिरक्ष युधिष्ठिरम्॥ ८॥
एतद्धि सर्वकार्याणां परमं कृत्यमाहवे।
 
 
अनुवाद
अतः अब मैं अपने भाई अर्जुन और बुद्धिमान सात्यकि के मार्ग का अनुसरण करूँगा। अब तुम सावधान रहो और युद्धभूमि में कुन्तीपुत्र राजा युधिष्ठिर की रक्षा करो। इस युद्धभूमि में यही हमारे लिए सबसे बड़ा कार्य है। ॥8 1/2॥
 
‘Therefore, now I will follow the path of my brother Arjun and the wise Satyaki. Now you be cautious and protect Kunti's son, King Yudhishthira on the battlefield. This is the greatest task for us in this battlefield.' ॥ 8 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)