Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.127.73-74: महाबली भीमसेन ने जोर-जोर से ताली बजाकर रथी सेना को भयभीत कर दिया और एक-एक करके श्रेष्ठ योद्धाओं को मार डाला। फिर समस्त रथियों के ऊपर से कूदकर उन्होंने द्रोणाचार्य की सेना पर आक्रमण कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन  »  श्लोक 73-74
 
 
श्लोक  7.127.73-74 
तलशब्दं च सुमहत् कृत्वा भीमो महाबल:॥ ७३॥
भीषयित्वा रथानीकं हत्वा योधान् वरान् वरान्।
व्यतीत्य रथिनश्चापि द्रोणानीकमुपाद्रवत्॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
महाबली भीमसेन ने जोर-जोर से ताली बजाकर रथी सेना को भयभीत कर दिया और एक-एक करके श्रेष्ठ योद्धाओं को मार डाला। फिर समस्त रथियों के ऊपर से कूदकर उन्होंने द्रोणाचार्य की सेना पर आक्रमण कर दिया।
 
By clapping his hands loudly, the mighty Bhima frightened the chariot army and killed the best warriors one by one. Then, jumping over all the charioteers, he attacked Dronacharya's army. 73-74.
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि भीमसेनप्रवेशे भीमपराक्रमे सप्तविंशत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १२७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें भीमसेनका प्रवेश और भयंकर पराक्रमविषयक एक सौ सत्ताईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२७॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)