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mahabharat 7.127.67: हे भरतश्रेष्ठ! तत्पश्चात् उसने युद्धस्थल में आपके वीर पुत्र सुदर्शन (उर्नाभ) को घायल कर दिया। इससे वह तुरन्त गिर पड़ा और मर गया। 67.   |   mahabharat अध्याय 7.127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  7.127.67 
तत: सुदर्शनं वीरं पुत्रं ते भरतर्षभ।
विव्याध समरे तूर्णं स पपात ममार च॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! तत्पश्चात् उसने युद्धस्थल में आपके वीर पुत्र सुदर्शन (उर्नाभ) को घायल कर दिया। इससे वह तुरन्त गिर पड़ा और मर गया। 67.
 
O best of the Bharatas! Thereafter he wounded your brave son Sudarshan (Urnabh) on the battlefield. Due to this he fell down immediately and died. 67.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)