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mahabharat 7.127.64: जैसे वर्षा ऋतु में बादल पर्वतों पर जल की धाराएँ बरसाते हैं, उसी प्रकार आपके पुत्र ने युद्धभूमि में भयंकर कर्म करने वाले पाण्डुपुत्र भीमसेन पर बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी।   |   mahabharat अध्याय 7.127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  7.127.64 
ते शरैर्भीमकर्माणं ववर्षु: पाण्डवं युधि।
मेघा इवातपापाये धाराभिर्धरणीधरम्॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
जैसे वर्षा ऋतु में बादल पर्वतों पर जल की धाराएँ बरसाते हैं, उसी प्रकार आपके पुत्र ने युद्धभूमि में भयंकर कर्म करने वाले पाण्डुपुत्र भीमसेन पर बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी।
 
Just as clouds pour down torrents of water on mountains during monsoon, similarly, your son began to shower arrows on Bhimasena, son of Pandu, who was performing terrible deeds on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)