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mahabharat 7.127.58: उस समय दु:शासन ने क्रोधित होकर पाण्डवपुत्र भीमसेन को मारने की इच्छा से एक तीक्ष्ण लोहे का बना रथ भीमसेन पर फेंका।   |   mahabharat अध्याय 7.127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  7.127.58 
ततो दु:शासन: क्रुद्धो रथशक्तिं समाक्षिपत्।
सर्वपारसवीं तीक्ष्णां जिघांसु: पाण्डुनन्दनम्॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
उस समय दु:शासन ने क्रोधित होकर पाण्डवपुत्र भीमसेन को मारने की इच्छा से एक तीक्ष्ण लोहे का बना रथ भीमसेन पर फेंका।
 
At that time Dushasan, enraged, desired to kill Pandava's son Bhimasena, and threw a sharp chariot made entirely of iron at him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)