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mahabharat 7.127.54-55: उस समय आपके पुत्रों ने पुनः आकर उस महारथी को चारों ओर से घेर लिया। योद्धाओं में श्रेष्ठ द्रोणाचार्य दूसरे रथ पर बैठकर सेना के द्वार पर पहुँचे और युद्ध के लिए तैयार हो गए।   |   mahabharat अध्याय 7.127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन  »  श्लोक 54-55
 
 
श्लोक  7.127.54-55 
तं पुन: परिवव्रुस्ते तव पुत्रा रथोत्तमम्॥ ५४॥
अन्यं तु रथमास्थाय द्रोण: प्रहरतां वर:।
व्यूहद्वारं समासाद्य युद्धाय समुपस्थित:॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
उस समय आपके पुत्रों ने पुनः आकर उस महारथी को चारों ओर से घेर लिया। योद्धाओं में श्रेष्ठ द्रोणाचार्य दूसरे रथ पर बैठकर सेना के द्वार पर पहुँचे और युद्ध के लिए तैयार हो गए।
 
At that time your sons again came and surrounded that great warrior from all sides. Dronacharya, the best of warriors, arrived at the gate of the formation sitting on another chariot and got ready for the battle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)