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mahabharat 7.127.53-54h: जैसे वायु अपने वेग से वृक्षों को उखाड़ देती है, उसी प्रकार उस गदा ने द्रोणाचार्य के रथ को घोड़े, सारथि और ध्वजा सहित कुचल डाला और बहुत से योद्धाओं को धूल में मिला दिया ॥53 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन  »  श्लोक 53-54h
 
 
श्लोक  7.127.53-54h 
साश्वसूतध्वजं यानं द्रोणस्यापोथयत् तदा॥ ५३॥
प्रामृद्नाच्च बहून् योधान् वायुर्वृक्षानिवौजसा।
 
 
अनुवाद
जैसे वायु अपने वेग से वृक्षों को उखाड़ देती है, उसी प्रकार उस गदा ने द्रोणाचार्य के रथ को घोड़े, सारथि और ध्वजा सहित कुचल डाला और बहुत से योद्धाओं को धूल में मिला दिया ॥53 1/2॥
 
Just as the wind uproots trees with its force, similarly that mace then crushed Dronacharya's chariot along with its horse, charioteer and flag and reduced many warriors to dust. ॥ 53 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)