Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.127.52-53h: राजन! ऐसा कहकर भीमसेन ने अपनी गदा उठाई, मानो यमराज ने मृत्युदंड हाथ में ले लिया हो। उन्होंने गदा घुमाकर द्रोणाचार्य पर प्रहार किया, किन्तु द्रोणाचार्य तुरन्त ही रथ से कूद पड़े।   |   mahabharat अध्याय 7.127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन  »  श्लोक 52-53h
 
 
श्लोक  7.127.52-53h 
अथोद्‍भ्राम्य गदां भीम: कालदण्डमिवान्तक:॥ ५२॥
द्रोणाय व्यसृजद् राजन् स रथादवपुप्लुवे।
 
 
अनुवाद
राजन! ऐसा कहकर भीमसेन ने अपनी गदा उठाई, मानो यमराज ने मृत्युदंड हाथ में ले लिया हो। उन्होंने गदा घुमाकर द्रोणाचार्य पर प्रहार किया, किन्तु द्रोणाचार्य तुरन्त ही रथ से कूद पड़े।
 
King! Saying this, Bhimasena picked up his mace as if Yamraj had taken the rod of death in his hand. He swung the mace and hit Dronacharya, but Dronacharya immediately jumped off the chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)