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mahabharat 7.127.5-6h: अतः हे द्रुपदपुत्र! मेरे लिए वहाँ जाना उतना आवश्यक नहीं है जितना कि यहीं रहकर राजा की रक्षा करना। यही हमारे लिए सबसे बड़ा कार्य है।'   |   mahabharat अध्याय 7.127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन  »  श्लोक 5-6h
 
 
श्लोक  7.127.5-6h 
न च मे गमने कृत्यं तादृक् पार्षत विद्यते॥ ५॥
यादृशं रक्षणे राज्ञ: कार्यमात्ययिकं हि न:।
 
 
अनुवाद
अतः हे द्रुपदपुत्र! मेरे लिए वहाँ जाना उतना आवश्यक नहीं है जितना कि यहीं रहकर राजा की रक्षा करना। यही हमारे लिए सबसे बड़ा कार्य है।'
 
‘Therefore, O son of Drupada, it is not as necessary for me to go there as it is to stay here and protect the king. This is the greatest task for us. 5 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)