vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन
»
श्लोक 48
श्लोक
7.127.48
तवार्जुनो नानुमते ब्रह्मबन्धो रणाजिरम्।
प्रविष्ट: स हि दुर्धर्ष: शक्रस्यापि विशेद् बलम्॥ ४८॥
अनुवाद
ब्रह्मबन्धो! अर्जुन आपकी अनुमति से इस युद्धभूमि में नहीं आया है। वह अजेय है। वह देवराज इन्द्र की सेना में भी प्रवेश कर सकता है। 48.
Brahmabandho! Arjun has not entered this battlefield with your permission. He is invincible. He can even enter the army of Devraj Indra. 48.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×