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mahabharat 7.127.48: ब्रह्मबन्धो! अर्जुन आपकी अनुमति से इस युद्धभूमि में नहीं आया है। वह अजेय है। वह देवराज इन्द्र की सेना में भी प्रवेश कर सकता है। 48.   |   mahabharat अध्याय 7.127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  7.127.48 
तवार्जुनो नानुमते ब्रह्मबन्धो रणाजिरम्।
प्रविष्ट: स हि दुर्धर्ष: शक्रस्यापि विशेद् बलम्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मबन्धो! अर्जुन आपकी अनुमति से इस युद्धभूमि में नहीं आया है। वह अजेय है। वह देवराज इन्द्र की सेना में भी प्रवेश कर सकता है। 48.
 
Brahmabandho! Arjun has not entered this battlefield with your permission. He is invincible. He can even enter the army of Devraj Indra. 48.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)