श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  7.127.44 
स मन्यमानस्त्वाचार्यो ममायं फाल्गुनो यथा।
भीम: करिष्यते पूजामित्युवाच वृकोदरम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
यह सोचकर कि यह भीम भी अर्जुन की भाँति मेरी पूजा करेगा, द्रोणाचार्य उससे इस प्रकार बोले-॥44॥
 
Thinking that this Bhima will also worship me like Arjun, Dronacharya spoke to him thus -॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)