श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  7.127.43 
ललाटेऽताडयच्चैनं नाराचेन स्मयन्निव।
ऊर्ध्वरश्मिरिवादित्यो विबभौ तेन पाण्डव:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
द्रोण ने मुस्कुराते हुए भीमसेन के माथे पर धनुष बाण चलाया। उस बाण से पाण्डवपुत्र भीमसेन ऐसे शोभायमान होने लगे जैसे सूर्य अपनी किरणों से ऊपर की ओर शोभायमान हो रहा हो।
 
Smiling, Drona shot a bow and arrow at Bhimasena's forehead. With that arrow, Bhimasena, son of Pandava, began to look as beautiful as the Sun with its rays rising up.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)