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mahabharat 7.127.42: फिर उन्होंने बड़े वेग से द्रोणाचार्य की सेना पर आक्रमण किया। जैसे समुद्र का तट अपनी बढ़ती हुई लहरों के कारण रुक जाता है, उसी प्रकार द्रोणाचार्य ने भीमसेन को रोक दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  7.127.42 
पुनश्चातीव वेगेन द्रोणानीकमुपाद्रवत्।
तमवारयदाचार्यो वेलोद्‍वृत्तमिवार्णवम्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
फिर उन्होंने बड़े वेग से द्रोणाचार्य की सेना पर आक्रमण किया। जैसे समुद्र का तट अपनी बढ़ती हुई लहरों के कारण रुक जाता है, उसी प्रकार द्रोणाचार्य ने भीमसेन को रोक दिया।
 
Then he attacked Dronacharya's army with great speed. Just as the shore of the ocean with its rising waves stops, in the same way Dronacharya stopped Bhimasena. 42.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)