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mahabharat 7.127.39: परन्तु भीमसेन ने अपने वेग से उन सबको लांघकर द्रोणाचार्य की सेना पर आक्रमण कर दिया और अपने बाणों की वर्षा से सामने खड़ी हाथी सेना को ढकना शुरू कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  7.127.39 
स तानतीत्य वेगेन द्रोणानीकमुपाद्रवत्।
अग्रतश्च गजानीकं शरवर्षैरवाकिरत्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
परन्तु भीमसेन ने अपने वेग से उन सबको लांघकर द्रोणाचार्य की सेना पर आक्रमण कर दिया और अपने बाणों की वर्षा से सामने खड़ी हाथी सेना को ढकना शुरू कर दिया।
 
But Bhimasena, with his speed, leapfrogged them all and attacked Dronacharya's army and began covering the elephant army standing in front of him with a shower of his arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)