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mahabharat 7.127.3: संजय कहते हैं: हे राजन! ऐसा कहकर बलवान भीमसेन राजा युधिष्ठिर को धृष्टद्युम्न तथा अन्य मित्रों के अधीन छोड़कर वहाँ से चले गये।   |   mahabharat अध्याय 7.127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.127.3 
संजय उवाच
एतावदुक्त्वा प्रययौ परिदाय युधिष्ठिरम्।
धृष्टद्युम्नाय बलवान् सुहृद्भॺश्च पुन: पुन:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं: हे राजन! ऐसा कहकर बलवान भीमसेन राजा युधिष्ठिर को धृष्टद्युम्न तथा अन्य मित्रों के अधीन छोड़कर वहाँ से चले गये।
 
Sanjaya says: O King! Having said this, the powerful Bhimasena left the place, leaving King Yudhishthira in the care of Dhrishtadyumna and other friends.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)