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mahabharat 7.127.28: भीमसेन बार-बार तुरही बजाते, शंख बजाते और धनुष की डोरी खींचते हुए सिंह के समान भयंकर गर्जना करते थे।   |   mahabharat अध्याय 7.127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.127.28 
आहत्य दुन्दुभिं भीम: शङ्खं प्रध्माप्य चासकृत्।
विनद्य सिंहनादेन ज्यां विकर्षन् पुन: पुन:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन बार-बार तुरही बजाते, शंख बजाते और धनुष की डोरी खींचते हुए सिंह के समान भयंकर गर्जना करते थे।
 
Bhimasena repeatedly beat his trumpet and blew his conch shells and repeatedly pulled his bowstring, thus making a terrifying roar like that of a lion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)