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mahabharat 7.127.19-20h: प्रजानाथ! जब भीमसेन युद्ध की इच्छा से आपकी सेना की ओर बढ़े, तब पुनः पाञ्चजन्य शंख की भयंकर ध्वनि सुनाई दी ॥19 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  7.127.19-20h 
प्रयाते भीमसेने तु तव सैन्यं युयुत्सया॥ १९॥
पाञ्चजन्यरवो घोर: पुनरासीद् विशाम्पते।
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! जब भीमसेन युद्ध की इच्छा से आपकी सेना की ओर बढ़े, तब पुनः पाञ्चजन्य शंख की भयंकर ध्वनि सुनाई दी ॥19 1/2॥
 
Prajanath! When Bhimsen moved towards your army with the desire for war, the terrible sound of the Panchjanya conch was again heard. 19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)