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mahabharat 7.127.17-18h: काले लोहे से बना और सोने से जड़ा उसका कीमती कवच ​​उसके शरीर के सभी अंगों पर फिट बैठता था और बिजली से चमकते बादल की तरह सुंदर दिखता था। 17 1/2   |   mahabharat अध्याय 7.127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  7.127.17-18h 
तस्य कार्ष्णायसं वर्म हेमचित्रं महर्द्धिमत्॥ १७॥
विबभौ सर्वत: श्लिष्टं सविद्युदिव तोयद:।
 
 
अनुवाद
काले लोहे से बना और सोने से जड़ा उसका कीमती कवच ​​उसके शरीर के सभी अंगों पर फिट बैठता था और बिजली से चमकते बादल की तरह सुंदर दिखता था। 17 1/2
 
His precious armour made of black iron and studded with gold, fitted all his body parts and looked beautiful like a cloud with lightning. 17 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)