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mahabharat 7.127.16-17h: अनुकूल वायु बहने लगी और उन्हें आसन्न विजय का संकेत मिलने लगा। रथियों में श्रेष्ठ पराक्रमी भीमसेन ढाल, सुन्दर कुण्डल, बाजूबंद और दस्तानों से सुसज्जित होकर अपने रथ पर सवार हुए।   |   mahabharat अध्याय 7.127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  7.127.16-17h 
अनुलोमानिलैश्चाशु प्रदर्शितजयोदय:।
भीमसेनो महाबाहु: कवची शुभकुण्डली॥ १६॥
साङ्गद: सतलत्राण: सरथो रथिनां वर:।
 
 
अनुवाद
अनुकूल वायु बहने लगी और उन्हें आसन्न विजय का संकेत मिलने लगा। रथियों में श्रेष्ठ पराक्रमी भीमसेन ढाल, सुन्दर कुण्डल, बाजूबंद और दस्तानों से सुसज्जित होकर अपने रथ पर सवार हुए।
 
A favourable wind started blowing and signalled them of an imminent victory. The mighty Bhimasena, the best among charioteers, mounted his chariot wearing a shield, beautiful earrings, armlets and gloves.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)