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mahabharat 7.127.12-13h: भरत! उस समय धर्मराज युधिष्ठिर ने कुन्तीपुत्र भीमसेन को गले लगाया, उनका मस्तक सूंघा और उन्हें आशीर्वाद दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  7.127.12-13h 
परिष्वक्तश्च कौन्तेयो धर्मराजेन भारत॥ १२॥
आघ्रातश्च तथा मूर्ध्नि श्रावितश्चाशिष: शुभा:।
 
 
अनुवाद
भरत! उस समय धर्मराज युधिष्ठिर ने कुन्तीपुत्र भीमसेन को गले लगाया, उनका मस्तक सूंघा और उन्हें आशीर्वाद दिया।
 
Bharata! At that time Dharmaraja Yudhishthira embraced Kunti's son Bhimasena, smelled his head and gave him his blessings. 12 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)