श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  7.127.10-11h 
नाहत्वा समरे द्रोणो धृष्टद्युम्नं कथञ्चन॥ १०॥
निग्रहं धर्मराजस्य प्रकरिष्यति संयुगे।
 
 
अनुवाद
‘युद्ध में धृष्टद्युम्न को मारे बिना द्रोणाचार्य किसी भी प्रकार धर्मराज को नहीं पकड़ सकेंगे।’ ॥10 1/2॥
 
‘Without killing Dhrishtadyumna in the battle, Dronacharya will not be able to capture Dharmaraja in any way.’ ॥10 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)