vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन
»
श्लोक 10-11h
श्लोक
7.127.10-11h
नाहत्वा समरे द्रोणो धृष्टद्युम्नं कथञ्चन॥ १०॥
निग्रहं धर्मराजस्य प्रकरिष्यति संयुगे।
अनुवाद
‘युद्ध में धृष्टद्युम्न को मारे बिना द्रोणाचार्य किसी भी प्रकार धर्मराज को नहीं पकड़ सकेंगे।’ ॥10 1/2॥
‘Without killing Dhrishtadyumna in the battle, Dronacharya will not be able to capture Dharmaraja in any way.’ ॥10 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×