Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.126.9-10: महाबाहु युधिष्ठिर मन में सात्यकि के रथ के विषय में इस प्रकार चिन्ता करने लगे - 'अहा! मैंने ही युद्धस्थल में मित्रों को रक्षा देने वाले सत्यवादी शिनि के पौत्र सात्यकि को अर्जुन के मार्ग पर जाने के लिए भेजा था। अतः मेरा यह हृदय जो पहले एक व्यक्ति की चिन्ता में डूबा हुआ था, अब दो व्यक्तियों की चिन्ता से दो भागों में बँट गया है॥9-10॥ | mahabharat अध्याय 7.126: युधिष्ठिरका चिन्तित होकर भीमसेनको अर्जुन और सात्यकिका पता लगानेके लिये भेजना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महाबाहु युधिष्ठिर मन में सात्यकि के रथ के विषय में इस प्रकार चिन्ता करने लगे - 'अहा! मैंने ही युद्धस्थल में मित्रों को रक्षा देने वाले सत्यवादी शिनि के पौत्र सात्यकि को अर्जुन के मार्ग पर जाने के लिए भेजा था। अतः मेरा यह हृदय जो पहले एक व्यक्ति की चिन्ता में डूबा हुआ था, अब दो व्यक्तियों की चिन्ता से दो भागों में बँट गया है॥9-10॥
Mahabahu Yudhishthira started worrying about Satyaki's chariot in his mind like this - 'Oh! I myself had sent Satyaki, the grandson of Shini, the truthful one who gives protection to friends in the battlefield, to go on Arjun's path. Therefore this heart of mine which was earlier immersed in the worry of one person, is now divided into two parts being worried about two persons.॥ 9-10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥