श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 126: युधिष्ठिरका चिन्तित होकर भीमसेनको अर्जुन और सात्यकिका पता लगानेके लिये भेजना  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  7.126.34-35h 
तमब्रवीदश्रुपूर्ण: कृष्णसर्प इव श्वसन्॥ ३४॥
भीमसेनमिदं वाक्यं प्रम्लानवदनो नृप:।
 
 
अनुवाद
तब राजा युधिष्ठिर ने उदास मुख वाले, काले सर्प के समान लम्बी साँस लेते हुए तथा नेत्रों में आँसू भरकर भीमसेन से इस प्रकार कहा -॥34 1/2॥
 
Then King Yudhishthira, with gloomy face and taking long breaths like a black serpent and with tears in his eyes, spoke to Bhimasena thus -॥ 34 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)