श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 126: युधिष्ठिरका चिन्तित होकर भीमसेनको अर्जुन और सात्यकिका पता लगानेके लिये भेजना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.126.22 
यस्य बाहुबलं सर्वे समाश्रित्य महात्मन:।
वनवासान्निवृत्ता: स्म न च युद्धेषु निर्जिता:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
इस महाहृदयी योद्धा के भुजबल का आश्रय लेकर हम सब भाई वनवास से सकुशल लौट आए हैं और युद्धों में कभी पराजित नहीं हुए हैं॥ 22॥
 
Taking shelter of the physical strength of this great-hearted warrior, all of us brothers have returned safely from our exile and have never been defeated in wars.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)