श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 126: युधिष्ठिरका चिन्तित होकर भीमसेनको अर्जुन और सात्यकिका पता लगानेके लिये भेजना  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  7.126.20-21 
न चाप्यसह्यं भीमस्य विद्यते भुवि किंचन॥ २०॥
शक्तो ह्येष रणे यत्त: पृथिव्यां सर्वधन्विनाम्।
स्वबाहुबलमास्थाय प्रतिव्यूहितुमञ्जसा॥ २१॥
 
 
अनुवाद
इस पृथ्वी पर ऐसा कोई कार्य नहीं है जो भीमसेन के लिए असह्य हो। वे अपने बाहुबल के आधार पर संसार के समस्त धनुर्धरों का सामना सहज ही कर सकते हैं।॥ 20-21॥
 
‘There is no such task on this earth which is unbearable for Bhimasena. By relying on his physical strength, he is capable of facing all the archers of the world easily.॥ 20-21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)