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mahabharat 7.125.74: महाराज! युद्धभूमि में निर्भय होकर विचरण करते हुए शत्रु द्रोण को वज्रधारी इन्द्र समझ रहे थे ॥74॥   |   mahabharat अध्याय 7.125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  7.125.74 
अथ द्रोणं महाराज विचरन्तमभीतवत्।
वज्रहस्तममन्यन्त शत्रव: शत्रुसूदनम्॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! युद्धभूमि में निर्भय होकर विचरण करते हुए शत्रु द्रोण को वज्रधारी इन्द्र समझ रहे थे ॥74॥
 
Maharaj! Wandering fearlessly in the battlefield, the enemy considered the enemy Drona to be Indra wielding the thunderbolt. 74॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)